
जावेद की माँ, जरीना, एक ४२ वर्षीय विधवा थी। उनका पति, आतिफ, दो साल पहले एक दुर्घटना में मर गया था। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। आतिफ की मौत से पहले, उनका तलाक हो चुका था। मुस्लिम कानून के तहत, तलाक के बाद अगर पत्नी फिर से पहले पति से शादी करना चाहे, तो उसे ‘हलाला’ का रिवाज निभाना पड़ता है।
हलाला का मतलब है कि तलाकशुदा औरत को किसी दूसरे मर्द से शादी करनी पड़ती है, और उस शादी को पूरा करना पड़ता है – यानी संभोग करना पड़ता है – तभी वो अपने पहले पति के पास लौट सकती है। लेकिन आतिफ की मौत ने सब कुछ उलट-पुलट कर दिया।





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